DNS क्या है? | What is DNS in Hindi |DNS कैसे काम करता है

आजकल इंटरनेट के समय में डोमेन नेम तो सब जानते ही होंगे जैसे – google.com, facebook.com आदि, मगर डोमेन नेम बिना डी. एन. एस. के काम ही नहीं कर सकते। किस डोमेन को किस IP से जोड़ना है यह सारा काम DNS System करता है। तो आइए जानते हैं कि डी. एन. एस. की फुल फॉर्म क्या है और यह कैसे काम करता है।

DNS full form डोमेन नेम सिस्टम (Domain Name System) है। यह शब्द इंटरनेट सेवा को संदर्भित करता है, जो एक Domain Name का IP पते में अनुवाद करता है। चूँकि डोमेन नाम alphabetical में दिए गए हैं, इसलिए उन्हें याद रखना आसान है। अनिवार्य रूप से, हर बार जब आप किसी विशेष डोमेन नाम का उपयोग करते हैं, तो DNS सेवा संबंधित आई. पी. पते पर इसका अनुवाद करती है। उदाहरण के लिए, डोमेन नाम listoffullfroms.com‘ का अनुवाद ‘123.123.123.123‘ के रूप में किया जा सकता है।

डी. एन. एस सिस्टम का अपना नेटवर्क है। इसलिए, यदि एक DNS सिस्टम अनुवाद करने में असमर्थ होता है, तो यह अन्य DNS सिस्टम की तलाश करता है जब तक कि IP पता प्राप्त नहीं होता है। इनके अतिरिक्त, DNS प्रणाली अपने मूल में Database सेवा की technicality का भी उल्लेख करती है। यह डी. एन. एस. के प्रोटोकॉल को परिभाषित करने के लिए है।

DNS डेटाबेस में संग्रहीत सबसे सामान्य प्रकार के रिकॉर्ड्स स्टार्ट ऑफ़ अथॉरिटी (SOA), IP एड्रेस (A और AAAA), SMTP मेल एक्सचेंजर्स (MX), नाम सर्वर (NS), रिवर्स DNS लुकअप (PTR) के लिए पॉइंटर्स के लिए हैं। और डोमेन नाम उपनाम (CNAME)।

DNS के प्रकार

1:- Root Servers :- Root Server को DNS के Top पर Position किया जा सकता है। यह top level zones के Maintain करता है। Root Servers को NIC के द्वारा Maintain किया जाता है।

2:- Primary Servers :- सामान्यतः हर Domain के लिए एक Primary Server होता है। किसी भी Domain मे सभी प्रकार के बदलाव इसी System के द्वारा होते है। ये जिस भी Domain को Serve करते है ये उस Domain के लिए Authoritative होते है।

3:- Secondary Servers :- प्रत्येक Domain के पास कम से कम एक Secondary Domain होता है। In Fact, NIC किसी भी Domain को तब तक Top Level Domain के Sub Domain के तौर पर तब तक Officially Registered नहीं करती है जब तक कोई Site दो DNS Servers को Demonstrate नहीं करती है। Secondary Servers के निम्नलिखित Features होते है:-

Dns kaise kam karta hai

माना हम browser में किसी website का नाम feed करते है जैसे google.com तो यह हम जानते है कि हम उस website में enter करना चाहते है लेकिन (But) computer यह नही जानता है कि ये google क्या है? Computer उस site पर IP address के माध्यम से पहुचता है।

जब हम website का नाम browser में feed करते है तो computer सबसे पहले browser के cache memory में उसका IP address check करता है क्योंकि अगर आपने पहले कभी उस website को browser पर search किया हो तो उसका IP address browser की cache memory में save हो जाता है। अगर browser cache में IP मिल जाये तो site open हो जाती है।

अगर यह browser cache में stored नही है तो यह आपके operating system को request transfer करेगा। Operating system यह Internet service provider(ISP) को request भेज देता है। जिसमे IP address का record हो सकता है अगर आपको वहां IP address का record नही मिलता है तो

यह request root server को भेज दी जाती है। रुट server में domain servers की IP मिल जाती है और यह computer को भेज दी जाती है और यह process इतनी इतनी जल्दी हो जाती है हम सोच भी नही सकते है यानी कि यह process milliseconds में ही पूरी हो जाती है।

IP address numbers के रूप में होता है जैसे 265.67.36 यह कुछ इस रूप का होता है।

DNS के फायदे

DNS पूरे Worldwide मे सिर्फ ऐसा System है जिसकी मदद से आप Internet को Browse कर सकते है। हम सब जानते है कि हम सब के जीवन मे एक Integral Part बन चुका है अब यह महत्वपूर्ण हो जाता है कि DNS Server को Maintain किया जाए बिना इनके Internet का कोई Exist ही नहीं रह जाता है।

इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपको IP Address को याद रखने की कोई जरूरत नहीं है। इनकी मदद से Domain और Sub Domain को IP Address मे Convert किया जा सकता है।

  • ये बहुत ज्यादा Secure होते है।
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  • इनमे Internet का Connection बहुत Fast होता है।
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  • इसकी मदद से आप Internet पर Websites को Search कर सकते है।
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  • यह Search Engines को Categorizing, Archiving जैसी सुविधाएं प्रदान करता है।
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  • यह DNS Protocol को Define करता है।

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