EMI क्या है?What is EMI in Hindi |EMI कैसे काम करता है

 

EMI की फूल फॉर्म Equated Monthly Installment होती है जिसे हिन्दी भाषा मे समान मासिक किस्त कहते है, जैसा की इसके नाम से ही स्पष्ट है की हर महीने एक निर्धारित राशि लेन्डर यानि की लोन देने वाले को देनी पड़ती है, ये राशि महीने की किसी निर्धारित तारिक को चेक या Online Payment करके भुगतान कि जाती है। 

EMI की फूल फॉर्मEquated Monthly Installment

बैंक से लोन लेने के अलावा भी ईएमआई का कई जगह पर इस्तेमाल किया जाता है, आजकल आप छोटे से छोटे समान को भी ईएमआई पर खरीद सकते है मोबाईल इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, Online और ऑफलाइन मार्केट मे EMI पर मोबाईल बहुत से लोग खरीदने लगे है।

EMI को प्रभावित करने वाले कारक

किसी बैंक या संस्था द्वारा लिए गए लोन पर आपको कितनी ईएमआई भरनी पड़ेगी ये इसके कारकों पर निर्भर करता है जैसे की आप लोन किस संस्था या बैंक से ले रहे है, आपका सीबील क्रेडिट स्कोर क्या है आदि लेकिन मुख्य रूप से केवल 3 कारक ईएमआई को प्रभावित करते है। 

लोन की राशि – ये वो पैसा होता है जो आप बैंक या किसी संस्था से लोन के रूप मे लेते हो, जितना ज्यादा ये राशि होगी आपकी EMI भी उतनी ही ज्यादा होगी। 

ब्याज दर – आपके लोन पर कितने प्रतिशत ब्याज लगेगा ये कारक आपकी ईएमआई को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है क्योंकि जितनी ज्यादा ब्याज दर होगी उतना ही पैसा आपको मूलधन से ज्यादा देना पड़ेगा। आपको लोन देने वाला बैंक या संस्था ब्याज दर को कई तरह से निश्चित करता है जैसे की आपकी क्रेडिट हिस्ट्री, आपकी सैलरी, भुगतान वापिस करने की क्षमता और मार्केट की स्थिति। 

समय – ईएमआई को प्रभावित करने वाला ये तीसरा सबसे महत्वपूर्ण कारक है जिसमे ये तय किया जाता है की आप बैंक या संस्था से लिया गया लोन कितने महीने या साल मे भुगतान करेंगे। ये समय जितना ज्यादा होगा आपकी ईएमआई उतनी ही छोटी होगी लेकिन समय के बढ़ने से आपको ब्याज दर ज्यादा देनी पड़ेगी। 

EMI के लाभ (Benefits of EMI)

  • EMI के द्वारा आप कोई भी आवश्यकता का सामान आसानी से खरीद सकते हैं |
  • यदि आपके पास किसी वस्तु को खरीदने के लिए पैसे नही है तो भी आप EMI के द्वारा वह वस्तु खरीद सकते है |
  • ऑफर के समय बिना ब्याज के भी EMI पर वस्तु खरीदने की सुविधा दी जाती है, इसमें EMI के साथ ब्याज नहीं देना पडता है |
  • यदि आप समय पर किस्त भर देते है तो आपका क्रेडिट स्कोर बढ जाता है |
  • EMI में धोखाधड़ी कम होने की सम्भावना होती है, यदि आप विश्वसनीय कम्पनी से EMI करवाते है |

EMI की हानि (LOss Of EMI)

  • EMI में वस्तुओं को महंगा खरीदना पड़ता है, इससे क़िस्त चुकाने मे परेशानी होती हैं |
  • समय पर किस्त ना भरने पर आपको कई प्रकार से सर्विस टैक्स देने पड सकते है |
  • EMI में यदि आपने पॉलिसी पढे बिना उससे जुड़ते है, तो आपको काफी नुकसान व परेशानी उठानी पड सकती है|

EMI काम कैसे करता है?

आप जो भी लोन लेते हैं उस लोन के टाइम पीरियड के हिसाब से उसको बांट दिया जाता है इसके साथ ही पूरे लोन की जो राशि होती है उसमें लगने वाली प्याज को भी टाइम पीरियड के हिसाब से बांट कर मासिक किस्तों में जोड़ दिया जाता है !

चलिए हम आपको एक उदाहरण के साथ समझाने की कोसिस करते हैं 

आपने 1 साल यानी 12 महीनों के लिए किसी बैंक से 100000 का लोन लिया है,

तो इसमें बैंक आप से 10% का ब्याज ले रहा है,

तो इसमें आपको 1 महीने का किस्त Rs.8792 लगेंगे

 इस किस्त में 8333 Rs. प्रिंसिपल यानी की मूल राशि होगी और इसमें 458 Rs. ब्याज जोड़ा गया है!

अगर आपको अपने हिसाब से ईएमआई कैलकुलेट करना है तो आप इस वेबसाइट emicalculator.net में जाकर अपनी ईएमआई कैलकुलेट कर सकते हैं !

 

EMI pay करने के कितने तरीके होते हैं 

ईएमआई पे करने के लिए आमतौर पर 2 तरीके होते हैं

1.Online

ईएमआई भुगतान के ऑनलाइन तरीके में आपको लोन लेते समय साइन किए हुए चेक या डेबिट क्रेडिट कार्ड की डिटेल देनी होती है फिर हर महीने आपके बैंक अकाउंट से एमआई अमाउंट कट होते रहता है !

2.Offline

और अगर आप ऑफलाइन तरीका चूस करते हैं तो उसके लिए आपको बैंक जाकर नकद पैसों का भुगतान करना होता है

यही  दो कारण होता हैं जिससे आप ईएमआई पे कर सकते हैं।

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